रविवार, 15 अगस्त 2010

राष्ट्र ध्वज तिरंगा .....गरीब भूखा नंगा

डॉo एस. राधाकृष्णन ने राष्ट्र ध्वज के तीन रंगों और अशोक चक्र की प्रतीकात्मक व्याख्या करते हुए -भगवे रंग को त्याग का प्रतीक मानते हुए, राजनेताओं को भौतिक लाभ का लोभ त्याग कर पूरी निष्ठां से देश सेवा की नसीहत दे डाली...... मध्य के सफ़ेद रंग को सच्चाई का प्रतीक मान कर अपने आचरण में पारदर्शिता और सच्चाई लाने को कहा..... हरे रंग को देश की हरियाली का प्रतीक मानतेहुए लोक हित में प्रगति का बीजारोपण करने का संदेश दिया। अशोक चक्र को.......

कानून के राज्य और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना गया....तिरंगे के तीनो रंगों की मूल भावना के तिरस्कार की आज होड़ लगी है -हमारे देश को प्रगति पथ पर ले जाने वालों के बीच..... हमारे राजनेताओं द्वारा पिछले ६३ सालों से देश की गरीब जनता की खून पसीने की कमाई को इस कद्र लूटा की आज दुनिया केसबसे गरीब देश के सबसे अमीर चोरों का काला पैसा स्विस बैंकों में १४ ख़राब डॉलर का आंकडा पार कर गया है.... यह है बापू के बेटों की त्याग भावना का प्रमाण ........
आज हमारे देश को किसी सच्चे और इमानदार देश भक्त की सख्त जरुरत है जो इन सभी कर्मों से परे होकर देश को उन्नति के राह पर ले जाये ...और सभी जात धर्म को समान आदर करे ..आवो हम इस पवन पर्व पर कसम लें की देश की उन्नति प्रगति के लिए हम सब मिल कर काम करे .....

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