गुरुवार, 12 अगस्त 2010
नाबालिक लडकी की रहस्मय मौत
मुंबई के साकीनाका इलाके मे एक 17 साल की लङकी की सुषमा पांङे की गुमशुदगी और फिर उसकी मौत से इलाके के लोग सन्न है.... एक प्राइवेट कंपनी मे काम करने वाली सुषमा 7 अगस्त को काम पर गई लेकिन घर वापस नही आई.... घरवालो ने रात भर उसे ढूंढा लेकिन वो जब नही मिली तो घरवालो ने उसके दफ्तर मे जाकर खोजबीन की.... लेकिन वो वहां भी नही मिली फिर उन लोगो ने पुलिस मे उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई.. दो दिन बाद सुषमा का बॉस सुशील शर्मा उसे लेकर लङकी की मां के पास पहुंचा... जिस वक्त लङकी अपने घर पहुंची उस वक्त लङकी की तबियत खराब थी जिसकी वजह से लङकी को तुरंत अस्पताल मे भर्ती करवाया गया.... अगले ही दिन लङकी की मौत हो गई... सुषमा के घरवालो का आरोप है कि उसके बॉस ने ही उसे अगवा किया था और उसे जहर खिलाकर मार ङाला... पुलिस का कहना है कि वो पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है उसके बाद वो मामले की तफ्तीश मे जुट जायेगी...
महाराष्ट्र सरकार की लक्जरी बस यात्रा
महाराष्ट्र सरकार द्वारा सस्ती दर पर लक्जरी यात्रा का शुभारम्भ प्रदेश के परिवहन मंत्री आर.के.विखे पाटिल द्वारा की गयी, मुंबई के प्रदेश परिवहन कार्यालय पर हुए इस समारोह में बोलते हुए पाटिल ने बताया की निजी वाहनों से यात्रा लोगो को काफी महँगी पड़ती है, अब सरकारी बेस लोगो को कम खर्चे पर उपलब्ध होगी, इस अवसर पर विभाग के वरिष्ट अधिकारी भी उपस्थित थे, अब देखना ये है सरकार की ये लक्जरी बेस आम लोगों के लिए कितनी उपयोगी साबित होती हैं,
एक और दुलहन चढ़ी दहेज़ की बली....
जिंदगी में रुकैया ने कभी ये भी नहीं सोचा होगा की दहेज़ की खातिर उसको जलाकर मार दिया जायेगा .....जी हाँ हम बात कर रहे हैं २५ वर्षीया रुकैया की .....जिसे दहेज़ के लोभियों ने मौत के घाट उतार दिया ....दिल दहला देने वाली यह घटना मुंबई के जुहू गली का है .......
मालाड मलवानी का वही इलाका है जहाँ पर रुकैया का बचपन गुजरा था और आज यही से उसका जनाजा उठ रहा है .....वैसे तो बहुत पहले से ही हमारा समाज दहेज़ प्रथा के खिलाफ है ...पर आज भी रुकैया जैसी कितनी मासूमों को दहेज़ के लिए जान गवानी पड़ रही है .....कभी अपने जीवन की हसीन सपने देखने वाली रुकैया आज कभी नहीं टूटने वाली नींद में सो गयी है .....जिंदगी ने भले ही उसे ठुकरा दिया पर मौत ने उसे गले लगा लिया .......करीब ढाई साल पहले बड़ी धूम धाम से उसके भाईयों ने अँधेरी के जुहू गली में रहने वाले जावेद से उसका निकाह किया था .....भाईयों ने कभी सोचा नहीं था की जहाँ पर उसके बहन की डोली जा रही है वहा से उसका जनाजा आएगा .......रुकैया ने अपने माता पिता को कई बार फोन करके सूचना दी थी की उसका पति जावेद उसको दहेज़ के लिए प्रताणित करता है ...और मारता पिटता है जिसके चलते उसके माता पिता ने इस मामले को कई बार सुलझाने की कोशिश भी की थी पर रुकैया को उसके ससुराल वालों द्वारा प्रताणित करने का सिलसिला जारी रहा ...और देखते ही देखते रुकैया की जीवन लीला ही समाप्त हो गयी .......
दहेज़ हत्या का मामला ड़ी यन नगर पुलिस ने दर्ज कर लिया है ...और आगे की तहकीकात कर रही है ....हमारे वरिष्ठ संबाद दाता विजय कुमार यादव ने जब पुलिस स्टेशन जाकर बात करने की कोशिश की तो कोई भी अधिकारी कैमरे पर कुछ कहने से इनकार कर कर दिया रुकैया का पति जावेद अपने हाथ पर किसी से वार करके अस्पताल में भर्ती हो गया है और पूरा परिवार फरार हो गया है ......अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुयी है .......ऐसे में अब आवाज उठाने लगी है की रुकैया के हत्यारों की गिरफ़्तारी कब होगी ....
मालाड मलवानी का वही इलाका है जहाँ पर रुकैया का बचपन गुजरा था और आज यही से उसका जनाजा उठ रहा है .....वैसे तो बहुत पहले से ही हमारा समाज दहेज़ प्रथा के खिलाफ है ...पर आज भी रुकैया जैसी कितनी मासूमों को दहेज़ के लिए जान गवानी पड़ रही है .....कभी अपने जीवन की हसीन सपने देखने वाली रुकैया आज कभी नहीं टूटने वाली नींद में सो गयी है .....जिंदगी ने भले ही उसे ठुकरा दिया पर मौत ने उसे गले लगा लिया .......करीब ढाई साल पहले बड़ी धूम धाम से उसके भाईयों ने अँधेरी के जुहू गली में रहने वाले जावेद से उसका निकाह किया था .....भाईयों ने कभी सोचा नहीं था की जहाँ पर उसके बहन की डोली जा रही है वहा से उसका जनाजा आएगा .......रुकैया ने अपने माता पिता को कई बार फोन करके सूचना दी थी की उसका पति जावेद उसको दहेज़ के लिए प्रताणित करता है ...और मारता पिटता है जिसके चलते उसके माता पिता ने इस मामले को कई बार सुलझाने की कोशिश भी की थी पर रुकैया को उसके ससुराल वालों द्वारा प्रताणित करने का सिलसिला जारी रहा ...और देखते ही देखते रुकैया की जीवन लीला ही समाप्त हो गयी .......
दहेज़ हत्या का मामला ड़ी यन नगर पुलिस ने दर्ज कर लिया है ...और आगे की तहकीकात कर रही है ....हमारे वरिष्ठ संबाद दाता विजय कुमार यादव ने जब पुलिस स्टेशन जाकर बात करने की कोशिश की तो कोई भी अधिकारी कैमरे पर कुछ कहने से इनकार कर कर दिया रुकैया का पति जावेद अपने हाथ पर किसी से वार करके अस्पताल में भर्ती हो गया है और पूरा परिवार फरार हो गया है ......अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुयी है .......ऐसे में अब आवाज उठाने लगी है की रुकैया के हत्यारों की गिरफ़्तारी कब होगी ....
जहरीला पानी का ज़हरीला असर.
मुंबई के समंदर में दुर्घटना हुई चित्रा जहाज के ज़रिये जो केमिकल फ़ैल रहा है जिससे पानी में पलने वाले जीव जंतुओं और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड रहा है... इसी के साथ इस केमिकल का असर समुन्दर किनारे बेस गाव में भी देखने को मिल रहा है...खेती का मौसम होने के कारण और इस तरह की आपदा के बाद फसल पर भी बुरा असर देखने को मिल रहा है.....
बुधवार, 28 जुलाई 2010
हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिए
हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिए
माँ ! हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे
हवा उड़ाए लिए जा रही है हर चादर
पुराने लोग सभी इन्तेक़ाल करने लगे
ऐ ख़ुदा ! फूल —से बच्चों की हिफ़ाज़त करना
मुफ़लिसी चाह रही है मेरे घर में रहना
हमें हरीफ़ों की तादाद क्यों बताते हो
हमारे साथ भी बेटा जवान रहता है
ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे
जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई
देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई
ख़ुदा करे कि उम्मीदों के हाथ पीले हों
अभी तलक तो गुज़ारी है इद्दतों की तरह
घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें
मुझको मत रोक मुझे लौट के घर जाना है
यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा
स्टेशन से वापस आकर बूढ़ी आँखें सोचती हैं
पत्ते देहाती रहते हैं फल शहरी हो जाते हैं
--
माँ ! हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे
हवा उड़ाए लिए जा रही है हर चादर
पुराने लोग सभी इन्तेक़ाल करने लगे
ऐ ख़ुदा ! फूल —से बच्चों की हिफ़ाज़त करना
मुफ़लिसी चाह रही है मेरे घर में रहना
हमें हरीफ़ों की तादाद क्यों बताते हो
हमारे साथ भी बेटा जवान रहता है
ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे
जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई
देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई
ख़ुदा करे कि उम्मीदों के हाथ पीले हों
अभी तलक तो गुज़ारी है इद्दतों की तरह
घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें
मुझको मत रोक मुझे लौट के घर जाना है
यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा
स्टेशन से वापस आकर बूढ़ी आँखें सोचती हैं
पत्ते देहाती रहते हैं फल शहरी हो जाते हैं
--
पूछते हो तो सुनो कौन हू मै
पूछते हो तो सुनो कौन हू मै
चन्द सिमटे हुए अशार् हू मै
सिर्फ़ तारीफ़ से यहा कुछ नही होता
आपकी दुआओ का तलबगार् हू मै
बयान्-ए-दिल पेश करता हू जब
लोग कहते है दिल-ए-बीमार हू मै
बोलू अगर खरा तो हू शमशीर
और अगर लिख डालू तो तलवार हू मै
तारीफ़ करने पर अगर उतर आऊ कभी
तो गुलफ़ाम हू मै, गुलज़ार हू मै
जज़्बात को सवारना जानता हू बहुत खूब
शायरी का सरताज हू, शहकार हू मै
लफ़्ज़ो से यू खेलना सबको नही आता
मुझे आता है, समझदार हू मै
है और भी खासियते मेरी दोस्तो
मिलो, बताने को तैयार हू मै.
चन्द सिमटे हुए अशार् हू मै
सिर्फ़ तारीफ़ से यहा कुछ नही होता
आपकी दुआओ का तलबगार् हू मै
बयान्-ए-दिल पेश करता हू जब
लोग कहते है दिल-ए-बीमार हू मै
बोलू अगर खरा तो हू शमशीर
और अगर लिख डालू तो तलवार हू मै
तारीफ़ करने पर अगर उतर आऊ कभी
तो गुलफ़ाम हू मै, गुलज़ार हू मै
जज़्बात को सवारना जानता हू बहुत खूब
शायरी का सरताज हू, शहकार हू मै
लफ़्ज़ो से यू खेलना सबको नही आता
मुझे आता है, समझदार हू मै
है और भी खासियते मेरी दोस्तो
मिलो, बताने को तैयार हू मै.
क्या लिखूँ
कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँ ॰॰॰॰॰॰
मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ॰॰॰॰॰॰
वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ
वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ
मै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ
मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ
मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ
बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ
सागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँ
वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ
सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ
गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ॰॰॰॰॰
मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ॰॰॰॰॰
मै ऎक ही मजहब को जी लुँ ॰॰॰या मजहब की आन्खे चार लिखूँ॰॰॰
कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ ॰॰॰॰॰॰॰॰
या दिल का सारा प्यार लिखूँ ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सापनो की सौगात लिखूँ ॰॰॰॰॰॰
मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ॰॰॰॰॰॰
वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ
वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ
मै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ
मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ
मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ
बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ
सागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँ
वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ
सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की मै बरसात लिखूँ
गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ॰॰॰॰॰
मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ॰॰॰॰॰
मै ऎक ही मजहब को जी लुँ ॰॰॰या मजहब की आन्खे चार लिखूँ॰॰॰
कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ ॰॰॰॰॰॰॰॰
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